Author: Rachna Pathak

Poetry has been a passion of mine since childhood. I have expressed my deepest feelings, emotions, and thoughts via Hindi poetry. Being a career-oriented woman in my early adulthood, I have had to make sacrifices and today the flowers of those sacrifices have bloomed. Also, being a mother of two, I truly hope that I can convey all my optimistic experiences with them through this platform.

असफलता की नींव पर

असफलताओं के दौर में,सफलता एक ख़ास मिली,शायद कुछ और मेरे लिए है चुना,कुदरत से ये आस मिली। मुड कर जब मैं देखूंगा,पहुंच कर उस ओर,ये दौर याद कर हँस लूंगा,क्योंकि हूंगा मैं किसी ओर छोर। मेरी कामयाबी इसी असफलता की नींव पर खड़ी है,असफलता ही तो यारों उन्नती की कड़ी है,मैं गर न हार जाता […]

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सारी उमर कौन रोता है?

तुम जो चले गए दुख तो बहुत होता है,जंदगी है यारों सारी उमर कौन रोता है,चद्दर की सिलवटों में तुम्हारी याद रहेगी,किसी जन्म में फिर मिलने की फरियाद रहेगी, रातों में चांद शायद ताने दे,हमको अपने वादे याद दिला दे,करवटों की हलचल कहां गई,सांसों की आवाज़ लुप्त हुई,अब आराम से यहां कौन सोता है,जिन्दगी है […]

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खेल

खेलो खेल खेलोमजे ले ले के खेलो खेलो खेल खेलो। फुट बाल खेला?या टेनिस,या फिर हॉकी,या क्रिकेट? थक जाओ तो आराम कर लो ,पानी पी लो,नहीं?थके नहीं?ये कौन सा खेल है?जिसमे थकते नहीं,रुकते नहीं? हम लोगों से खेलते हैं ,उनकी भावनाओं से,आदत है खेलने की ,थकते नहीं,रुकते नहीं ।इधर से सुना उधर दे डाला,मजे लेने के […]

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दोस्त

दोस्त बहुत अच्छे होते है;कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं;एक थाली में खाना;भूख ना होने का करना बहाना;मेरे पैसे बचाना,उस पर बात टाल जाना।यही दोस्त पक्के होते हैं;कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं। सिर पर हाथ रखे तो ठंडक पड़ जाए;गले जो मिले तसल्ली मिल जाए;गुस्से में भी जिनके प्यार नजर आए;कुछ मेरे दोस्त ऐसे […]

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क्षितिज से अनंत तक

बांटा है समय ने,कुछ ऐसी गहराई से;दो छोर के बीच का सफर मेरामानो घिर गया है धुंद और परछाई से। है अलग अलग सा अहसास बहुत;कभी पीड़ा,कभी अल्हाद बहुत;है शिखर पर भावनाओं की, खड़ी हो सोच रही;क्षितिज सा और अनंत सा रहा हर मेरा अनुभव;अंतराल के खालीपन ने अनंत से मिला दिया। हाथो में थी […]

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रंजिशे ए जिंदगी

जिंदगी की आज कुछ तहकीकात की;कुछ पुराने पन्नों की जांच पड़ताल की। आदतन है ले बैठा था कलम;स्याही ने गिर कर हकीकत पन्नों पर डाल दी। क्यों उठे धुएं से परछाई बना रहे थे?जिंदगी की हवा ने तो बनावट उधार दी। हम गले मिले?या गालों से गाल टकराएं;खोखली सी हवा में वो गर्मी कहां से […]

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