Author: Khem Kiran Sani

मेरा नाम खेमकिरण है । पिछले पच्चीस वर्षों से शिक्षण कार्य में हूँ । एक ‘किसान’ की बेटी और एक ’जवान’ की पत्नी होने के कारण ज़िंदगीके कई रंगों को बहुत करीब से देखने का अनुभव संजोया है। सकारात्मकता एवं स्पष्टवादिता में विश्वास रखती हूँ। कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति का एक सरल साधन और माध्यम है । मैं शायर तो नहीं , पर हिंदी शिक्षण के लबे अनुभव ने शब्दों के साथ खेलने की प्रवृत्ति को जन्म दिया और मैंने बातों को अपने लहज़े में कहना शुरु किया ।अपने अनुभवो के धागों से मैंने कविताओं के रूप में ज़िंदगी का एक शामियाना तैयार किया है। इस मंच के ज़रिए कलाप्रेमियों से सांझा करने का मौकामिला है। कला और साहित्य का संगम सदैव ही सराहनीय रहा है। रोड टू संगम की सफलता के लिए शुभ कामनाएँ!

शिक्षा का व्यापार

गाँव-गाँव तक फैल गया है शिक्षा का प्रसार लेकिन शिक्षा  बन बैठी है अब एक कारोबार बच्चों के स्कूलों से ही तय होता है अब  परिवार का सामाजिक आधार। पाँच सितारा होटेलों के जैसे स्कूल की इमारतें की जाती हैं तैयार, सरकारी सहायता के एवज में लाभ कमाने के अवसर होते साकार । इंटरनेशनल स्कूल […]

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खुद को भी तो वक्त दो

खुद को भी थोड़ा वक्त दो :- आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने घर -परिवार, स्वास्थ्य और स्वयं के लिए भी समय नहीं निकाल पाता है और पैसे की होड़ में जीवन की सच्ची खुशियों को भूलता जा रहा है । हम सभी को अपने लिए […]

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