Art Hindi Poems Literature Poems

असफलता की नींव पर


असफलताओं के दौर में,

सफलता एक ख़ास मिली,
शायद कुछ और मेरे लिए है चुना,
कुदरत से ये आस मिली।

मुड कर जब मैं देखूंगा,
पहुंच कर उस ओर,
ये दौर याद कर हँस लूंगा,
क्योंकि हूंगा मैं किसी ओर छोर।

मेरी कामयाबी इसी असफलता की नींव पर खड़ी है,
असफलता ही तो यारों उन्नती की कड़ी है,
मैं गर न हार जाता तब ,
तो ये दिन कहां से आता,
तरक्की का यह हार शायद कोई ना पहनाता।

तो फिर गर गिर जाऊं ,
तो उठाना ना मुझे,
ना गले लगाना ,ना फुसलाना कभी,
मैं गिर के उठने वालों में से हूँ,
बहुत हिम्मत बाकी है मुझमें अभी।

मैं असफलता पर इमारत बनाना जानता हूँ,
गिर कर उठना और लड़खड़ा कर समहलना जानता हूँ।,
पल पल को जोड़ कर ,
खूबसूरत जिंदगी बनाना जानता हूँ।

Picture by David Kovalenko

Please follow and like us:
error

Leave a Reply