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सारी उमर कौन रोता है?


तुम जो चले गए दुख तो बहुत होता है,

जंदगी है यारों सारी उमर कौन रोता है,
चद्दर की सिलवटों में तुम्हारी याद रहेगी,
किसी जन्म में फिर मिलने की फरियाद रहेगी,

रातों में चांद शायद ताने दे,
हमको अपने वादे याद दिला दे,
करवटों की हलचल कहां गई,
सांसों की आवाज़ लुप्त हुई,
अब आराम से यहां कौन सोता है,
जिन्दगी है यारों सारी उमर कौन रोता है।

वह तुम्हारा माथे पर चूम लेना
और प्यार से बाहों में भर लेना,
अब कहां होता है,
जिंदगी है यारों सारी उमर कौन रोता है।

सासों में भारीपन है,
आंखों में नमी
खलति जरूर है तुम्हारी कमी
इस सब से भी क्या होता है?
जिंदगी है यारों सारी उमर कौन रोता है।

Picture by Cristian Newman (Unsplash)

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