जानती हूँ


कौन रहता साथ हमेशा,
जानती हूँ, फिर भी चाहती हूँ.••••
वो भी इस बात में
शामिल है,
जानती हूँ,फिर भी कहती हूँ•••••
चुन रही हूँ,गुलों की
शक्ल मे काँटे,
जानती हूँ,फिर भी
चुनती हूँ•••••
या तो रुक जाऊँ,
या गम उठाऊँ,
या छोड के निकल जाऊँ,
जानती हूँ,फिर भी चलती हूँ•••••
दर्द का दर्द ही दवा मेरी,
जानती हूँ,फिर भी रोती हूँ•••••

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1 thought on “जानती हूँ

  1. Indeed! A great journey of Mrs Alka Singh as a home maker to author, painter and poet. Reflection of spiritualism, human psychology can easily be seen/ understood through her poetries and paintings. Wonderful collection of Wisdom.

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